नवजात बेबी के परवरिश करने के टिप्स

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स्थाई परिवारिक सदस्यों के बीच जब किसी नये सदस्य (शिशु) के आगमन की खबर आती है तो पुरे घर में ख़ुशी का वातावरण बन जाता है। भारत वर्ष में नये शिशु की देखभाल की फ़िक्र जितनी माता-पिता को होती है उतना  ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी होती है। परिवार का हर सदस्य उस नन्हे मेहमान को दुनिया की हर ख़ुशी देना चाहता है पर 9 महीने बाद जब बच्चा अस्तपाल से अपने घर में कदम रखता है तो उस नन्ही जान का घर  में स्वागत कीटाणुओं के संक्रमण,गंदगी और कई गम्भीर बिमारियों से होता है। अक्सर माता-पिता अपने जान से प्यारे बच्चे की देखभाल में कुछ सप्ताह बाद लापरवाही बरतने लगते है जबकि कुछ वर्षों तक बच्चे के खाने-पीने और साफ सफाई का पूरा ध्यान माता-पिता को रखना चाहिए।





पॉटी की सिखलाई
: बच्चे के दिन की शुरआत पॉटी से कराए। बच्चा सुबह-सुबह पॉटी करें कोई जरूरी नही है पर यदि माता-पिता बच्चे के पॉटी का समय सुबह निश्चित कर उसकी आदत बनाते है तो स्कूल जाने की उम्र में बच्चे को अधिक परेशानी का सामना नही करना पड़ता और बच्चे का पेट भी साफ़ रहता है नवजात शिशु को निश्चित समय पर सूसू, पॉटी की आदत पकडवाने के लिए आप शी-शी की आवाज का इस्तेमाल कर सकती है। छोटे बच्चे माँ का स्तनपान करने के थोड़े समय बाद सूसू जरुर करते है इसलिए थोडा समय निकल जाने के फौरन बाद आप खुद बच्चे को सूसू करा दे। सूसू या पॉटी करने के बाद किसी साफ़ और नर्म तौलिए से बच्चे की त्वचा को अच्छी तरह से साफ़ कर दें ताकि किसी तरह के सक्रमण का कोई खतरा ना रहे।


इन सब उपायों के अतिरिक्त आप बाजार से पॉटी चेयर खरीदकर आप बच्चे को पॉटी मैनर्स बड़ी आसानी से सिखा सकती है। इसके अलावा सबसे अधिक ध्यान देने वाली बाते ये होती कि बीमारी में अगर बच्चा 4 से 5 घटें के बीच सूसू नही करता है तो बिना वक़्त गवाएं आप फौरन अपने नजदीकी डॉक्टर से सम्पर्क कर लें।





डायपर
: अक्सर माँ-बाप बच्चे की नैपी खरीदते वक़्त लपरवाही कर जाते है। जब भी आप अपने बच्चे के लिए डायपर खरीदे उसकी क्वालिटी और कंपनी की जाँच ज्ररूर कर ले। बच्चे की स्किन का ध्यान रखते हुए हेमशा बच्चे के लिए सॉफ्ट डायपर का ही चुनाव करें और जितना जल्दी हो सकें गीले डायपर बदल दें क्योकि नवजात शिशु की त्वचा काफी नाजुक और सवेंदनशील होती है और यदि समय रहते डायपर न बदला जाए तो बच्चे को खुजली के साथ-साथ डायपर से त्वचा पर रैशेज हो जाते है।





मालिश स्वयं करें
: आज के कामकाजी माहौल में अक्सर माता-पिता अपने बच्चे की मालिश का काम किसी नौकरानी को या अन्य किसी मालिश वाले को दे देते है जो कि सही नही है जहाँ तक सम्भव हो बच्चे की मालिश खुद ही करें अन्यथा घर का कोई खास सदस्य ही करें। चाइल्ड स्पेशलिस्ट भी मानते है कि जब कोई बच्चे की मालिश करता है तो बच्चा भावनात्मक रूप से मालिश करने वाले के साथ जुड़ जाता है।


बच्चे के मालिश के लिए हमेशा ऐसी जगह का चुनाव करे जो ना तो अधिक ठंडा हो और ना ही अधिक गर्म। हल्का गर्म कमरा मालिश के लिए सबसे उपयुक्त हो सकता है। बच्चे की मालिश शुरू करने सबसे पहले हाथों की चूडि़यां व अन्य गहने निकाल दें। बच्चों की मालिश के लिए हमेशा ही नारियल,बादाम या अन्य वेजीटेबल आयल का इस्तेमाल करें। मालिश से बच्चे का विकास तो सही होता ही है साथ में उसे अच्छी और गहरी नींद भी मिलती है।


बच्चे की मालिश करते हुए इस बात की सवाधानी अवश्य बरतें कि बच्चे को कोई बीमारी ना हो। बीमारी होने पर डॉक्टर के परामर्श के बाद ही मालिश करें। इसके अलावा बच्चे की मालिश कभी भी सरसों के तेल से ना करें और मालिश करने के कुछ देर बाद बच्चे को जरुर नहला दें।





बच्चे को नहलाने की विधि
: बच्चे को तब तक स्पंज बाथ कराते रहे जब तक कि बच्चे का नाभिनाल निकल ना जाए। एक बार बच्चे का नाभिनाल निकल जाए और बच्चा थोडा बड़ा हो जाए उसके बाद बच्चे को रोज नहलाते हुए बच्चे अंडरआर्म्स और यूरिनरी पार्ट्स की अच्छी तरह सफाई करें।


बच्चे को नहलाने के लिए सिर्फ और सिर्फ बेबीसोप व शैंपू का ही प्रयोग करें इसके अलावा इस बात का भी खास ध्यान रखे की बच्चे का बाथटब हमेशा साफ़ सुथरा हो। बच्चे को नहलाते समय उसके सिर और पौटी वाली जगह पर जरुर साबुन लगाएं। अपने बच्चे को नहलाने के बाद हमेशा सॉफ्ट टॉवल से बच्चे के शरीर का पानी सुखा दें।


नोट : साबुन का अधिक इस्तेमाल बच्चे की त्वचा के लिए सही नही होता इसलिए बेबीसोप का अधिक इस्तेमाल ना करें।





काजल
: बच्चे की ऑंखों पर कभी भी काजल का इस्तेमाल ना करे क्योकि इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बाजारी काजल के अलावा घर के काजल से भी दुरी बना कर रखें। काजल के साथ-साथ बच्चे की त्वचा पर अधिक पाउडर का इस्तेमाल भी सही नही होता है।





बच्चों के कपड़े : बच्चों के कपडे अगर अच्छी क्वालिटी व साफ़ ना हो तो खुजली और छोटे-छोटे दाने निकलने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती है। बच्चो को अच्छे कपडे पहनाने के साथ-साथ उनके धोने के लिए भी अच्छे प्रोडक्ट का प्रयोग करें। अपने बच्चे की सावधानी के लिए आप चाहे तो कपडे धोने के बाद उसे डेटोल के अन्दर साफ़ कर सकती है।






नाख़ून की सफाई : प्राय: सभी बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत होती है और ऐसे में अगर बच्चे के नेल गंदे होंगे तो इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है इसलिए बच्चो के नाखूनों को काट कर और उनकी सफाई हमेशा रखें। अंगूठा चूसने के अलावा बच्चे कई बार खुद अपनी त्वचा घायल कर लेते है इसलिए बच्चो के नाखूनों को काटना अति आवश्यक है। बच्चे को नहलाने के बाद आप बड़ी आसानी से बच्चे के नाखूनों को काट सकती है।





दूध : 6 माह तक बच्चे के लिए माँ का दूध सर्वोतम आहार होता है पर किसी कारण वश अगर माँ अपना स्तनपान ना करा सके तो निप्पल की सफाई गर्म पानी से करने के बाद ही बच्चे को दूध पीने दें। इसके अलावा बच्चों के खिलौनों की सफाई पर भी प्राथमिकता से ध्यान दें।


इस बातों के अलावा आप नीचे लिखी इन बातों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।


•    कभी भी गंदे हाथों से बच्चे का स्पर्श ना करें।


•    जब भी बाहर से आते है तो बिना मुह-हाथ धोये बच्चे को गोद में ना उठाये।

 
•    बच्चे को सारा दिन चुमते रहना अच्छी बात नही होती।


•    कुछ बच्चों में हारमोन की वजह से ब्रेस्ट को प्रेस करने पर दूध निकलता है ऐसी समस्या होने पर कुछ दिन समस्या खत्म होने का इंतेजार करे। कुछ दिन बाद भी अगर समस्या समाप्त नही होती तो डॉक्टर से सलाह लें।

उपरोक्त सभी बातों का ध्यान रखते हुए नवजात बच्चे की परवरिश करें।
 
 

Kids!#Tips For Care A Newborn Baby

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