बच्चे के अन्दर आत्मविश्वास पैदा करने के आसान उपाय

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जब भी किसी माता पिता से पूछो वह अपने बच्चो के लिए क्या चाहता है तो लगभग सभी पेरेंट्स एक ही जवाब देते है वह सिर्फ अपने बच्चे को जीवन भर खुश देखना चाहते है।आत्मविश्वास बहुत जरूरी है एक सफल और सुखी जीवन के लिए एक व्यक्ति के अंदर प्रतिभा को तो भरा जा सकता है पर आत्मविश्वास की कमी उस प्रतिभा को दिखाने रिश्ते और नौकरी या यूं कहे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में एक दिवार बन सकती है।


प्रारंभिक वर्षों में बच्चे में सकारात्मक आत्मविश्वास की नींव उसके माता पिता ही रखते है। कोई भी माता-पिता अपने प्यारे बच्चे की सभी चीजों को नियंत्रण नहीं कर सकते। बच्चा हमारी कौन सी बातो को सुन रहा हो और वो हमारी बातों का क्या अर्थ निकाल रहा है या हमारी छवि की कौन सी बातों को गंभीरता से ग्रहण कर रहा है या सब पूर्ण रूप से हम अपने वश में नही कर सकते है लेकिन फिर भी हम अपने बच्चे में  सकारात्मक आत्मविश्वास डाल कर इस चुनौतीपूर्ण समाज में उसके जीवन का पथ आसान तो बना ही सकते है।





यहाँ हम कुछ सरल रणनीतियों को आपसे शेयर कर रहे है जिनकों अपनाकर आप अपने बच्चे के आत्मसम्मान को बढ़ावा देने में उसकी मदद कर सकते है



1. बिना शर्त प्यार दे : जब भी आप अपने बच्चे को लाड प्यार करते है तो बच्चे और आपमें एक अजीब से तार जुड़ जाती है और कौन हैं या आप क्या करते हैं ये सब भूल कर बच्चे में एक अजीब से भक्ति आप के लिए पनप उठती है। आपके प्रेम का प्रभाव सबसे अधिक तब होता है जब आप उसकी ताकत स्वभाव, कमियों सब को अपनाकर दुलार देते है।


निरंतर थोड़े थोड़े अंतराल पर बच्चे के साथ लिपट जाना चुंबन आदि भवनावों से आप उससे कितना प्यार करते हैं उसे बताना मत भूलिए। आप अपने प्यार को इस डर से मत दबा के रखिये कि वो बिगड़ जायेगा।
  

अगर आप अपने बच्चे की कमियां दूर करना चाहते है तो तो उसके व्यवहार का स्पष्ट जवाब दे कि उसका व्यवहार अस्वीकार्य है। बजाय ये कहने के कि तुम बहुत शरारती हो गए हो, तुम अच्छे क्यों नहीं हो सकता है?" तुम कब सुधरोगे आदि।


2. ध्यान दें : अपने बच्चे को तराशने के लिए आपको अपने बच्चे पर पूरा ध्यान और समय देना होगा। जब आप अपने बच्चे का पूरा ख्याल रखते है तो आपके बच्चे को ये मेसेज जाता है कि वह आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान है। बच्चे की यही भावनाएं उसके आत्मविश्वास वृद्धि में किसी चमत्कार से कम कार्य नही करती।


इसके लिए बहुत अधिक समय बच्चे के साथ व्यतीत करने की अवास्कता नही है बस उसके स्कूल से आने के बाद ऑफिस से ही कुछ क्षणों के लिए उससे सप्ताह में एक दो बार फ़ोन पर भी बाते कर सकते है। रात का खाना एक साथ खा कर छुट्टी वाले दिन साथ में खेल कर या कभी कभी यू ही सुबह बच्चे के साथ उठकर उससे आखों से आंखे मिलाकर उसकी सारी बातें सुने।


3. सीमा तय करें: अपने बच्चे के लिए आपको निरन्तर उसकी आयु के हिसाब से कुछ उचित नियम स्थापित करते रहना चाहिए। उदाहरण के तौर पर वह अपने दोस्त के घर आपको बताये बिना न जाए। जब भी आप बाइक की सवारी करे उसे हेलमेट पहनने के नियम के बारें में जरुर बताएं। बच्चे को नियम तोड़ने से पहले परिणाम का ज्ञान होना आवश्यक है। आपको हर नियम के साथ उसके परिणाम पहले से ही सुनिश्चित करने होंगे जैसे बिना हेलमेट पहने वह अपनी बाइक की सवारी नही कर सकता।


कुछ परिवारों में नियम पत्थर की लकीर के हिसाब से लागू किये जाते है। वह बच्चा अधिक सुरक्षित महसूस करता है। वहां बच्चे  जल्द ही अपनी उम्मीदों से जीना शुरू कर देते है और इन्ही नियमों की वजह से उन्हें अपने द्वारा किये अच्छे और बुरे कामों को परिणामस्वरुप समझने में सुगमता होगी और उसके अन्दर अनुशाशन पैदा होगा। बस यहाँ आपको एक बात का ध्यान रखना है उसकी उम्र के समयसीमा को देखकर ही बनाएं जाएँ बेवजह नियम उसपर धोपने की कोशिश हरगिज न करें।





4. जोखिम का समर्थन करें:
बच्चे के कुछ नया करने के लिए उसे हमेशा प्रोत्साहित करें। जैसे भोजन में कुछ नया खाने की की कोशिश। नये दोस्त बनाना या फिर स्केटबोर्ड की सवारी इस तरह के स्वस्थ जोखिम को लेकर बिना डर हमेशा उसे उत्साहित करें। सफलता और विफलता को किनारे रख प्रतिस्पर्धा में भाग लेने की क्रियाएँ उसके आत्मविश्वास निर्माण में विशेष रूप से सहायक होती है।


अगर आप अपने बच्चे को लेकर काफी सुरक्षित रहते है तो हम आग्रह करते है कि बच्चे को थोडा जोखिम लेने दे उदाहरण के लिए वह एक मुश्किल शब्द पढ़ने के लिए हताशा दिख रहे अपने बच्चे के "बचाव" में आने की वजह उसे कुछ मिनटों तक कोशिश करने दें बहुत अधिक सुरक्षित रहने और हमेशा उसमे विफलता की संभावना देखने से उसके आत्मविश्वास में काफी कमी आती है हमेशा उसके नए नए कार्यों से निपटने के लिए  मदद और प्रयास का संतुलन बना कर रखे क्योकि जीवन जोखिम के बिना सफलता पाने के अवसर बहुत कम है।


5. गलतियों को होने दे: जाहिर सी बात है जोखिम उठाने का का दूसरा नाम गलतियां करना है। जब भी आपका बच्चा किसे नये कार्य को करना शुरू करता है तो वह कभी कभी गलती करने के लिए बाध्य हो जाता है यकीन मानिये यही गलतियां आत्मविश्वास के लिए बहुमूल्य सबक साबित होंगी।  
अगर कभी बेडरूम में समय गवाने की वजह से आपके बच्चे की बस छुट जाती है तो कड़वा बोलने की जगह यह सोचने के लिए उसे प्रोत्साहित करें की अगली बार ऐसा क्या करे जिससे फिर कभी ऐसा न हो इस तरह वह समझ जायेगा। कभी कभी गलती करना बड़ा अपराध नही है और उसकी सोच में नकरात्मक भाव भी नही आएंगे।

6. अच्छे कार्य का जश्न मनाये : हर कोई अपने किये कार्य की सराहना चाहता है। आपके दुलारे के अच्छे कामों की खबर जब भी आपके कानों तक पहुचे आप उसे उसके कामों के लिए सिर्फ बधाई देने की जगह कभी कभी विशिष्ट हो परिवार के साथ जश्न भी जरुर मनाये।

7. बच्चे की बात हमेशा ध्यान से सुने : जब भी आपके बच्चा को आप से बात करने की जरूरत हो आप अपना सारा काम बंद करके सबसे पहले उसकी बातो को ध्यान से सुने। आप उसकी बातो से ही उसके विचारो भावनाओ और इच्छाओं को जान सकते है।

बच्चे की भावना व्यक्त करते वक़्त आप हमेशा उसके साथ बड़े प्यार से ही पेश आये। उसकी भावनाओं को बिना लॉजिक लगाये मान दे। कभी कभी आप भी (दादी के तबियत की वजह से धोड़ा दुखी हु ) अपनी खुद के की भावनाओं को अपने बच्चे के साथ शेयर करे ऐसा करने से उसमे अपनी बातें आपसे साँझा करने के लिए विश्वास हासिल होगा।





8. तुलना न करें :
"तुम क्यों अपने भाई की तरह नहीं हो “ ,या तुम रोहन की तरह पढाई नही कर सकते, बस बहुत हो गया ये तुम्हारे लिए शर्म की बात है। हम इस तरह की टिप्पणी करके गलत प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा और ईर्ष्या के भाव जन्म देने के साथ साथ बार बार उसको याद दिलाते है कि आपके बच्चे का तरीका तुलात्मक बच्चो से कमतर है।

कई सकारात्मक उर्जाये उस वक़्त व्यर्थ साबित होती है जब आप अपने बच्चे की तुलना किसी और से करते है। हर बच्चे की अपनी एक विशेषता होती है और उसकी ये खूबी उस वक़्त खो जाती है जब आप उससे किसी दुसरे की कॉपी करने को कहते है और वह  खुद भी अपने से ज्यादा दूसरों के विचारो को महत्व देने लग जाता है।

9. सहानुभूति प्रदान न करें : जाने अनजाने कई बार हमारे द्वारा अपने बच्चे के साथ की गयी सहानुभूति उनके आत्मविश्वास पर बुरा असर डालती है। उदहारण के तौर पर तुम राजू की तरह अच्छा बास्केटबॉल नहीं फेंक सकते तो उससे कोई फर्क नही पड़ता अगर हम इसी बात को राजू का मन बास्केटबॉल में लगता है और वह बास्केटबॉल में काफी अच्छा खिलाड़ी है ठीक तुम्हारी तरह जैसे तुम्हारा मन दौड़ने में लगता है और तुम एक तेज धावक हो सिर्फ सही शब्दों का चुनाव करके हम उसके आत्मविश्वास को गिरने से बचा सकते है।

आपके बच्चे के मन में कभी भी ऐसे विचार आते है कि वह गणित नहीं कर सकता  और वह एक कमजोर स्टूडेंट है तो आप उसे कह सकते है तुम्हे सिर्फ गणित के साथ परेशानी है बाकी सब्जेक्ट्स में तुम काफी अच्छे हो। ऐसा कहकर आप उसकी अधिक यथार्थवादी प्रकाश में चीजों को देखने में उसकी मदद कर सकते है। आप बच्चे का सही आकलन कर उसकी सभी परेशानी दूर करने में मदद करे कभी भी झूठी बातो से उसे सहानुभूति न प्रदान करें। ऐसा करने से बच्चे को अपनी कमी और ताकत का ज्ञान होगा और उसे मानसिक तौर पर मजबूती प्रदान होगी।

10. प्रोत्साहन प्रदान करते रहे : हर बच्चा अपने माता पिता से यही संकेत चाहता की उसके पेरेंट्स उस पर विश्वास करते है। जब भी बच्चा स्टडी में किसी परेशानी से गुजर रहा हो और उसके प्रियजन उसके समर्थन में आ कर कहते है कि तुम बहुत मेहनत कर रहे हो लगे रहो तुम्हे सफलता अवश्य मिलेगी। अपने प्रियजनो से प्रोत्साहन मिलने के बाद बच्चे को जहा अधिक प्रयास करने का हौसला मिलता है वही उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

एक बाद याद रखिये प्रशंसा और प्रोत्साहन के बीच फर्क होता है। प्रशंसा दूसरे व्यक्ति को पुरस्कृत करने लिए की जाती है और प्रोत्साहन प्रयास करने के लिए दिया जाता है। प्रशंसा को खैरात की तरह मत बाटिये बहुत अधिक प्रशंसा से बच्चे के अन्दर अति आत्मविश्वास आ जाता है जो जीवन में तरक्की करने के लिए बिल्कुल ठीक नही है इसलिए विवेकपूर्ण तरीके से ही दोनों का इस्तेमाल करना चाहिए।  

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